राष्ट्रपति द्वारा पद्म पुरस्कार प्रदान
पाठ्यक्रम: GS1/संस्कृति
समाचार में
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के लिए 66 विशिष्ट व्यक्तित्वों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। यह प्रथम नागरिक अलंकरण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुआ।
समाचार के बारे में
- पद्म पुरस्कार प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस पर घोषित किए जाते हैं।
- वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को स्वीकृति प्रदान की, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।
- शेष पुरस्कार विजेताओं को दूसरे समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
प्रमुख प्राप्तकर्ता
- धर्मेंद्र सिंह देओल को कला में योगदान हेतु मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
- एन. राजम को संगीत में योगदान हेतु पद्म विभूषण प्रदान किया गया।
- भगत सिंह कोश्यारी को लोक मामलों में योगदान हेतु पद्म भूषण मिला।
- उदय कोटक को व्यापार और उद्योग में योगदान हेतु पद्म भूषण प्रदान किया गया।
- हरमनप्रीत कौर को खेलों में योगदान हेतु पद्म श्री मिला।
- लोक संगीतकार टागा राम भील को अल्गोज़ा की परंपरा को जीवित रखने हेतु पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
पद्म पुरस्कार
- पद्म पुरस्कार: देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक, जिसकी स्थापना 1954 में हुई।
- तीन श्रेणियाँ:
- पद्म विभूषण: भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
- पद्म भूषण: तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
- पद्म श्री: चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार।
- कला, सामाजिक कार्य, लोक मामले, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य एवं शिक्षा, खेल और सिविल सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं।
- प्रतिवर्ष 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को घोषित किए जाते हैं।
- जाति, पेशा, पद या लिंग की भेदभाव किए बिना सभी व्यक्तियों को दिए जा सकते हैं।
- मरणोपरांत भी प्रदान किए जा सकते हैं।
- चयन प्रक्रिया:
- अनुशंसाएँ राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, पूर्व पुरस्कार विजेताओं और जनता द्वारा की जाती हैं।
- पद्म पुरस्कार समिति का गठन प्रतिवर्ष प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है।
- समिति की अनुशंसाएँ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को स्वीकृति हेतु प्रस्तुत की जाती हैं।
स्रोत: TH
प्रातास द्वीपसमूह
पाठ्यक्रम: GS1/भूगोल; GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- हाल ही में प्रातास द्वीपसमूह में चीन और ताइवान के तटरक्षक बलों के बीच समुद्री गतिरोध देखा गया।
प्रातास द्वीपसमूह के बारे में
- स्थान: प्रातास द्वीपसमूह, जिसे डोंगशा द्वीप भी कहा जाता है, दक्षिण चीन सागर के उत्तरी भाग में स्थित प्रवाल एटॉल का समूह है।
- ये द्वीप दक्षिणी ताइवान, हांगकांग और चीनी मुख्यभूमि के बीच लगभग मध्य में स्थित हैं।
- वर्तमान में यह एटॉल ताइवान द्वारा प्रशासित और नियंत्रित है।
- जनसंख्या: द्वीपों पर जनसंख्या बहुत कम है और मुख्यतः ताइवान के तटरक्षक कर्मी और अनुसंधान सुविधाएँ विद्यमान हैं।
- पारिस्थितिक महत्व: इस क्षेत्र में डोंगशा एटॉल राष्ट्रीय उद्यान भी शामिल है, जो समुद्री जैव विविधता और प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रसिद्ध है।
- रणनीतिक महत्व: दक्षिण चीन सागर के उत्तरी किनारे पर स्थित होने के कारण ये द्वीप समुद्री निगरानी और नौसैनिक अभियानों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: IE
जीवन ऐप और शतायु जेरियाट्रिक केयरगिवर डैशबोर्ड का शुभारंभ
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जीवन मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया गया।
परिचय
- उद्देश्य: देशभर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए सहयोग तंत्र को सुदृढ़ करना।
- जीवन ऐप की विशेषताएँ: सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी, आपातकालीन सहायता एवं वरिष्ठ नागरिक गृहों का विवरण।
- प्लेटफ़ॉर्म को उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस, सरल नेविगेशन और पहुँच सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है।
- मंत्रालय ने शतायु (सीनियर होलिस्टिक केयर असिस्टेंस एंड ट्रेनिंग फॉर योर यूटिलिटी) डैशबोर्ड भी लॉन्च किया।
- इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
- यह वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच और सामाजिक समावेशन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसमें किसी विशेष जिले और राज्य में उपलब्ध जेरियाट्रिक केयरगिवर्स की जानकारी प्रदान करने की सुविधा है।
स्रोत: AIR
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिककरण योजना (PMFME)
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिककरण योजना (PMFME) के क्रियान्वयन और उपलब्धियों पर मीडिया से संवाद किया।
परिचय
- PMFME योजना वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा शुरू की गई।
- इसका उद्देश्य भारत के असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान करना है।
- यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसकी कुल लागत ₹10,000 करोड़ है। इसे 2020-21 से 2024-25 तक लागू करने की स्वीकृति दी गई थी और अब इसे सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
- योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) दृष्टिकोण को भी लागू करती है, जिससे खरीद, सामान्य सेवाओं और बाज़ार संपर्क में पैमाने की अर्थव्यवस्था संभव होती है।
- अब तक 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 726 जिलों में 137 विशिष्ट उत्पादों की पहचान की गई है।
- उपलब्धियाँ: कुल 1,96,270 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी घटक के अंतर्गत समर्थन दिया गया है, जिनमें से 40% से अधिक लाभार्थी महिला उद्यमी हैं।
- ब्रांडिंग और विपणन समर्थन के अंतर्गत 32 प्रस्ताव एवं 40 ODOP ब्रांड स्वीकृत किए गए, जिनसे 200 से अधिक खाद्य उत्पाद लॉन्च हुए।
- कुल 1,164 सूक्ष्म उद्यमों को सीधे ब्रांडिंग और विपणन सहायता का लाभ मिला।
स्रोत: PIB
भिन्नात्मक क्वांटम हॉल प्रभाव (FQHE)
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- क्वांटम पदार्थों में हालिया प्रगति, विशेषकर ट्विस्टेड मल्टीलयर ग्राफीन में, ने भौतिकविदों को अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों के बिना भिन्नात्मक क्वांटम हॉल प्रभाव (FQHE) को पुनः निर्मित करने में सक्षम बनाया है।
हॉल प्रभाव
- हॉल प्रभाव की खोज 1879 में एडविन हॉल ने की थी।
- सिद्धांत: जब इलेक्ट्रॉन चुंबकीय क्षेत्र में किसी चालक से गुजरते हैं, तो वे लॉरेंज बल नामक पार्श्व बल का अनुभव करते हैं।
- यह बल विद्युत आवेशों को चालक के एक ओर जमा कर देता है, जिससे हॉल वोल्टेज नामक अनुप्रस्थ वोल्टेज उत्पन्न होता है।
- हॉल प्रभाव ने वैज्ञानिकों को पदार्थों में विद्युत आवेश वाहकों की प्रकृति समझने में सहायता की।
क्वांटम हॉल प्रभाव (QHE) क्या है?
- क्वांटम हॉल प्रभाव (QHE) हॉल प्रभाव का क्वांटम यांत्रिक संस्करण है, जो द्वि-आयामी इलेक्ट्रॉन प्रणालियों में अत्यधिक निम्न तापमान और शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों में देखा जाता है।
- सामान्य परिस्थितियों में विद्युत प्रतिरोध चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता के साथ धीरे-धीरे बदलता है।
- लेकिन क्वांटम परिस्थितियों में हॉल प्रतिरोध केवल विभाजित चरणों में बदलता है। इसे हॉल प्रतिरोध का क्वांटीकरण कहा जाता है।
- QHE ने प्रदर्शित किया कि सूक्ष्म स्तर पर इलेक्ट्रॉनों का व्यवहार क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का पालन करता है।
- पूर्णांक क्वांटम हॉल प्रभाव (IQHE): इसमें हॉल प्रतिरोध केवल पूर्णांक मान (1, 2, 3 आदि) लेता है।
- यह प्रभाव तब होता है जब इलेक्ट्रॉन शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों में लैंडाउ स्तर नामक ऊर्जा स्तरों पर नियन्त्रण करते हैं।
- भिन्नात्मक क्वांटम हॉल प्रभाव (FQHE): इसमें हॉल प्रतिरोध 1/3, 2/5, 3/7 जैसे भिन्नात्मक मान लेता है।
- यह इलेक्ट्रॉनों के बीच सुदृढ़ अंतःक्रियाओं के कारण होता है, जो सामूहिक क्वांटम अवस्थाएँ बनाते हैं।
- इन अवस्थाओं से एयॉन नामक क्वासिकण उत्पन्न होते हैं, जिनमें भिन्नात्मक विद्युत आवेश होता है।
अनुप्रयोग
- FQHE से उत्पन्न एयॉन को फॉल्ट-टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए आशाजनक माना जाता है।
- एयॉन सामान्य क्वांटम कणों की तुलना में अधिक स्थिर तरीके से क्वांटम सूचना संग्रहीत कर सकते हैं।
- QHE विद्युत प्रतिरोध के अत्यंत सटीक मापन प्रदान करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेट्रोलॉजी में प्रतिरोध मानक परिभाषित करने हेतु प्रयोग होता है।
- QHE ने ग्राफीन जैसे उन्नत क्वांटम पदार्थों पर अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
स्रोत: TH
कार्बन-रहित फेरोसीन में सफलता
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- आईआईटी मद्रास और भारतीय विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक नया कार्बन-रहित अणु संश्लेषित किया है, जिसकी संरचना फेरोसीन जैसी है। यह एक रसायन विज्ञान की पहेली थी जो 70 वर्षों से अव्याख्यायित थी।
फेरोसीन क्या है?
- फेरोसीन एक रासायनिक यौगिक है जिसकी खोज 1950 के दशक में हुई थी।
- इसकी संरचना अद्वितीय सैंडविच संरचना है, जिसमें एक लौह परमाणु दो कार्बन-रिंग अणुओं के बीच स्थित होता है।
- फेरोसीन ऑर्गेनोमेटैलिक रसायन में अत्यधिक स्थिरता और असामान्य बंधन के कारण महत्वपूर्ण है।
- इसका उपयोग दवाओं, बैटरियों, उत्प्रेरकों, उन्नत सामग्रियों और इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है।
नई खोज क्या है?
- शोधकर्ताओं ने पूरी तरह कार्बन-रहित फेरोसीन जैसी संरचना वाला अणु संश्लेषित किया।
- नए अणु में लौह के स्थान पर ऑस्मियम और कार्बन रिंगों के स्थान पर बोरॉन-आधारित रिंग हैं।
- इस खोज ने सात दशकों से अनसुलझी वैज्ञानिक पहेली को हल कर दिया।
खोज का महत्व
- यह सफलता सिद्ध करती है कि कार्बन के बिना भी स्थिर फेरोसीन जैसी सैंडविच संरचनाएँ विद्यमान हो सकती हैं।
- इससे रासायनिक बंधन और आणविक स्थिरता की वैज्ञानिक समझ का विस्तार हुआ।
- यह खोज उन्नत सामग्रियों, नैनोप्रौद्योगिकी, उत्प्रेरण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में नई संभावनाएँ खोलती है।
स्रोत: IE
ओरेश्निक मिसाइल (Oreshnik Missile)
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
संदर्भ
- रूस ने कीव, यूक्रेन पर रातभर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले में अपनी शक्तिशाली ओरेश्निक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का प्रयोग किया।
परिचय
- ओरेश्निक एक मध्यम दूरी की हाइपरसोनिक आयुध प्रणाली है, जिसे रूस की RS-26 रुबेझ प्रणाली पर आधारित माना जाता है।
- यह परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है।
- इसकी मारक क्षमता 3,000 से 5,500 किलोमीटर के बीच आंकी गई है, जिससे यूरोप के बड़े हिस्से को निशाना बनाया जा सकता है।
- इसकी गति मैक 10 (लगभग 2.5–3 किलोमीटर प्रति सेकंड) होने के कारण आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना लगभग असंभव है।
- ओरेश्निक की विशेषता यह है कि यह एक साथ कई वारहेड ले जाकर विभिन्न लक्ष्यों पर प्रहार कर सकता है, जो सामान्यतः अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) से जुड़ी क्षमता है।
क्या आप जानते हैं?
- ओरेश्निक की मारक क्षमता उस श्रेणी में आती है जिसे शीत युद्ध कालीन मध्यम दूरी परमाणु बल (INF) संधि के अंतर्गत प्रतिबंधित किया गया था। अमेरिका ने 2019 में इस संधि से बाहर निकलने की घोषणा की थी, जिसके बाद रूस ने भी ऐसा किया।
स्रोत: HT
तड़ित/आकाशीय विद्युत (Lightning) से होने वाली मृत्युओं में निरंतर वृद्धि
पाठ्यक्रम: GS3/आपदा प्रबंधन
संदर्भ
- भारत में तड़ित/आकाशीय विद्युत (Lightning) सबसे घातक प्राकृतिक आपदा के रूप में उभरी है, और इससे होने वाली मृत्युओं की संख्या वर्षों से निरंतर वृद्धि हो रही है।
परिचय
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्टों की समीक्षा से पता चला कि 1975 से 2024 के बीच 50 वर्षों में देश में आकाशीय विद्युत गिरने से कुल 1,02,263 मृत्यु हुईं।
- इनमें से आधी से अधिक मृत्युएँ 2005 से 2024 के बीच हुईं।
- 2016 से तड़ित/आकाशीय विद्युत गिरने से होने वाली मृत्यें प्राकृतिक कारणों से हुई कुल मृत्यु का कम से कम 50% रही हैं, जबकि चक्रवात और बाढ़ से कम मृत्यु हुईं।
- राज्यवार आँकड़े बताते हैं कि अधिकांश मृत्युएँ गैर-प्रायद्वीपीय राज्यों में हुईं।
- वर्ष 2024 में पाँच राज्यों—मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़—में कुल मृत्यु का लगभग 60% दर्ज किया गया।
तड़ित/आकाशीय विद्युत क्या है?
- तड़ित/आकाशीय विद्युत वातावरण में बादलों, वायु या भूमि के बीच उत्पन्न होने वाली विशाल विद्युत चिंगारी है।
- गर्जन वाले बादलों में लाखों वोल्ट का विद्युत आवेश होता है और बादल के अंदर विभिन्न ध्रुवीयता उपस्थित होती है।
- प्रारंभिक अवस्था में वायु सकारात्मक और नकारात्मक आवेशों के बीच इन्सुलेटर का कार्य करती है।
- जब विपरीत आवेश पर्याप्त मात्रा में बढ़ जाता है, तो वायु की इन्सुलेशन क्षमता टूट जाती है और तीव्रता से विद्युत निर्वहन होता है, जिसे तड़ित/आकाशीय विद्युत कहा जाता है।
- तड़ित/आकाशीय विद्युत बादल के अंदर विपरीत आवेशों के बीच या बादल और भूमि के बीच हो सकती है।

- प्री-मानसून मौसम में गंभीर आंधी-तूफान बनने की परिस्थितियाँ अत्यधिक अनुकूल होती हैं।
पूर्वानुमान और जागरूकता
- भारत मौसम विज्ञान विभाग वर्तमान में आंधी-तूफान का पूर्वानुमान प्रदान करता है।
- भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) दमिनी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से तड़ित/आकाशीय विद्युत गिरने की वास्तविक समय की चेतावनी देता है।
- यह ऐप 23 क्षेत्रीय भाषाओं में आंधी-तूफान के दौरान सावधानी संबंधी दिशानिर्देश साझा करता है, जिससे सुरक्षा जानकारी अधिक सुलभ होती है।
- बढ़ती मृत्युएँ इस बात पर बल देती हैं कि जनता में तड़ित/आकाशीय विद्युत गिरने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति अधिक जागरूकता उत्पन्न की जाए।
स्रोत: TH
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संक्षिप्त समाचार 26-05-2026